तो जिस दिन का इंतजार था वो आ ही गया। आज पद्मावती फ़िल्म का ऑफिसियल ट्रेलर प्रदशित किया गया। ट्रेलर में ऐसा कुछ नही दिखा जिसमे लगे कि फ़िल्म में हिन्दू(राजपूतो) के सम्मान से कोई खिलवाड़ किया गया हो बल्कि भंसाली ने राजपूतो को समर्पित फ़िल्म भी बताया। ये उस देशव्यापी विरोध का ही परिणाम है कि भंसाली को कुछ अक्ल आयी है। चलो एक नजर इस चित्र पर भी डालते है।
अब अगर देखा जाए तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये ट्रेलर हिन्दुओ के लिए एक लॉलीपॉप मात्र है जिससे भंसाली को फ़िल्म रिलीज़ करवाने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े या फिर वाकई में उसने तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नही की। इसपर सबकी राय अलग अलग आ रही हैं। कुछ मान रहे है कि भंसाली की एक चाल है तो कुछ कह रहे है इतिहास को सही दिखाया जाएगा।
अगर मैं अपनी बात करु तो मेरी राय में ये दोनों हो सकते है। हो सकता है भंसाली ने युवाओं को शांत करने के लिए ऐसा किया हो? या फिर उसे धुलाई के बाद अक्ल आगयी हो? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका पता कैसे चले और आगे क्या किया जाए?
तो इसका उत्तर ये है जो विरोध चल रहा है उसे ओर बढ़ाया जाए तथा सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जैसे बड़े समाज सेवी व राजपूत इतिहासकारों की एक टीम बने जो फ़िल्म को रिलीज़ होने से पहले एक बार देखे तथा उसकी रिकॉर्डिंग भी हो जिसे सेंसर बोर्ड या टीम अपने पास रखे ताकि भंसाली भविष्य में पलट न जाये। अगर फ़िल्म में सब कुछ ठीक ठाक हुआ तो किसी को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए नही तो जो करना है वो आप सब भली भांति जानते ही है।
बस चाहे कुछ भी हो जाये माँ पद्मावती के आत्मसम्मान के साथ किसी प्रकार का कोई खिलवाड़ न हो।
तो दोस्तो बस आज के लिए इतना ही। सुझाव अच्छा लगे तो शेयर जरूर करे। जल्दी फिर मिलेंगे एक नये विषय के साथ। तब तक के लिए जय हिंद वन्दे मातरम।
Rituraj Singh Pundir
(Indian Voice)
Keep supporting guys
Sahi baat h
ReplyDelete